क़ारिन तथा मुफरिद के ऊपर वाजिब है कि वह केवल एक सई करें, जब्कि मुतमत्तेअ दो सई करेगा।

क़ारिन तथा मुफरिद के ऊपर वाजिब है कि वह केवल एक सई करें, जब्कि मुतमत्तेअ दो सई करेगा।